स्वस्थ एवं आत्मनिर्भर भारत की तरफ बढ़ते कदम

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2023
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Abstract
‘‘स्वास्थ्य ही है जो वास्तविक धन है, सोने और चाँदी के टुकड़े नहीं है।’’ जिस प्रकार से दुनिया में तेजी से आर्थिक एवं सामाजिक परिवर्तन हो रहे हैं, जिससे कहीं न कहीं हम अपने स्वास्थ्य पर ध्यान नहीं दे पा रहे हैं। पश्चिमी देशों की तुलना में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता की तुलना में हम बहुत पीछे हैै। हम अपनी जीडीपी का 2ः भी स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च नहीं कर पाते हैं।भारतीय नागरिकों को अभी तक स्वास्थ्य का अधिकार एक मौलिक अधिकार के रूप में प्राप्त नहीं हुआ है। यहाँ शिक्षा की तरह नागरिक का वैधानिक अधिकार भी नहीं है। शिक्षा का विषय हमारे संविधान के अनुसार राज्य सरकारों को सौंपा गया है। स्वास्थ्य पर कुल सरकारी व्यय का लगभग दो तिहाई हिस्सा राज्य सरकारों से आता है और बाकी एक तिहाई हिस्सा केन्द्र सरकार उपलब्ध कराती है। इसके अलावा यह भी वास्तविकता है कि भारत सरकार ने व्यापक प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल प्रदान करने के लिए स्वास्थ्य आरोग्य केन्द्रों तथा प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (आयुष्मान भारत, जैसी सफल योजनाओं से स्वास्थ्य नीतियों पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाला है। भारत सतत् विकास के 2030 के एजेन्डों पर हस्ताक्षर करने वाला देश भी है, जबकि एक राष्ट्र के रूप में ‘सबके लिए स्वास्थ्य को बढ़ावा देने और स्वास्थ्य जीवन सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध भी है।आजादी के बाद पिछले 7 दशक में भारत में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। इस दौरान देश में 1,58,417 स्वास्थ्य उपकेन्द्रों 25743 प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों और 5,624 सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों का नेटवर्क तैयार हुआ है। वर्ष 2018 के बाद से 30,000 से भी अधिक उपकेन्द्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में सुविधाओं को बेहतर बनाते हुए इसे ‘‘हेल्थ एण्ड वेलनेस सेंटर’ का दर्जा दिया गया है।भारत में नवजात मृत्युदर का आंकड़ा 1994 में प्रति 1000 बच्चों पर 74 था जो वर्ष 2017 में घटकर 33 हो गया। 1990 में देश की औसत आयु 58 वर्ष थी, जो 2017 में बढ़कर 69 वर्ष हो गयी।भारत चेचक, टिटनेस, पोलियो और गिनिया कृमि रोग के उन्मूलन में सफल रहा है। साथ ही कुष्ठ रोग, मलेरिया, कालाजार आदि सक्रामक बिमारियों को काफी हद तक नियंत्रित कर लिया गया है। वर्ष 2025 तक टीबी को भी समाप्त करने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहे हैं। संक्रामक रोगों से होने वाली मौतों में काफी गिरावट आयी है, परन्तु देश के सामने गैर-संक्रामक और जीवन शैली से जुड़ी बिमारियाँ कैंसर, मधुमेह, किडनी, हृदय रोग, मानसिक रोग आदि से निपटने और देशी, सस्ते और नवाचारी उपायों के जरिये सबको स्वास्थ्य बीमा मुहैया कराने सम्बन्धी लक्ष्य हासिल करने का प्रयास किया जा रहा है। भारत में गैर-संक्रामक बिमारियों की हिस्सेदारी 55ण्4ः है और जिसके कारण 62ः होने वाली मौतों की वजह भी गैर-संक्रामक बीमारियाँ हैं।
Reference Key
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Authors अशेष कुमार उपाध्याय
Journal International Journal of Science and Social Science Research
Year 2023
DOI
10.5281/zenodo.13375470
URL
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